शिक्षक भर्तीशिक्षक भर्ती में धांधली के मिलने लगे सुबूतv में धांधली के मिलने लगे सुबूत

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परिषदीय विद्यालयों में 68500 शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी की जांच कर रही जांच समिति के सदस्यों को कॉपियों की जांच में गंभीर खामियां मिल रही हैं। कॉपी में काट-छांट और उत्तर बदले जाने की पुष्टि हो रही है। समिति के सदस्य लगातार तीसरे दिन कॉपियों में गड़बड़ी की खोज करते रहे। परीक्षार्थियों का आरोप है कि कॉपी में गड़बड़ी के साथ अधिक अंक होने के बाद कम अंक दिए गए हैं। कॉपी की जांच में परीक्षार्थियों के आरोप की लगातार पुष्टि के बाद अब जांच रिपोर्ट में आने में समय लगेगा।

शिक्षक भर्ती के परिणाम में गड़बड़ी की जांच के लिए शासन की ओर से गन्ना सचिव संजय भूसरेड्डी, सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक डॉ. वेदपति मिश्र और निदेशक बेसिक शिक्षा सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह की अगुवाई में जांच समिति का गठन किया गया है। जांच समिति के सदस्यों ने इससे पहले भी परीक्षा नियामक कार्यालय आकर पूर्व सचिव डॉ. सुत्ता सिंह एवं पूर्व रजिस्ट्रार जीवेंद्र सिंह ऐरी को सामने बैठाकर परीक्षा में गड़बड़ी के बाबत पूछताछ की थी, जिसमें समिति के सदस्यों को परीक्षा में गड़बड़ी के साक्ष्य मिले थे।

परीक्षा नियामक कार्यालय से लौटने के बाद टीम की रिपोर्ट के आधार जांच समिति के प्रमुख ने परीक्षार्थियों से कॉपी और परीक्षा में गड़बड़ी के संबंध में साक्ष्य मांगे थे। 19 सितंबर को साक्ष्य लेने की तिथि बीतने के बाद जांच समिति के मुखिया ने अमर उजाला से कहा था कि शिक्षक भर्ती की कॉपियों का दोबारा मूल्यांकन होगा। इसके बाद उन्होंने टीम के सदस्यों को कॉपियों की जांच के लिए दोबारा भेजा है। टीम के सदस्यों को लगातार कॉपियों में मिल रही गड़बड़ी के बाद अब जांच की अवधि बढ़ने की संभावना है।
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परीक्षा नियामक कार्यालय पर दिन भर जमा रहे परीक्षार्थी
शिक्षक भर्ती परीक्षा की गड़बड़ी की जांच की मांग कर रहे परीक्षार्थी मंगलवार को भी दिनभर परीक्षा नियामक कार्यालय पर जमे रहे। परीक्षार्थियों ने कॉपियों की दोबारा जांच के साथ पूरी परीक्षा की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। परीक्षार्थियों ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से मिलकर उन्हें ज्ञापन देकर मांग की कि परीक्षा निरस्त कर दोबारा परीक्षा कराई जाए। सचिव परीक्षा नियामक अनिल भूषण चतुर्वेदी का कहना था कि परीक्षा में गड़बड़ी का मामला हाईकोर्ट में लंबित है, कोर्ट के निर्देश के बाद ही शासन इस बारे में निर्णय लेगा।

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