दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठयक्रम का हिस्सा बन सकती है नंदिनी सुंदर की समाजशास्त्री पुस्तक

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दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग (डीयू) समाजवादी विशेषज्ञ नंदिनी सुंदर की पुस्तक ‘The Burning Forest: India’s war in Bastar’ को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विचार कर रही है। आपको बता दें कि नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) के कुछ सदस्यों ने विरोध कर पढ़ाई सूची से प्रसिद्ध समाजशास्त्री की पुस्तक को पिछले साल हटा दिया था।

हालांकि इस विषय पर, विभाग के अधिकारियों ने कहा कि पुस्तक “तकनीकी रूप से” सूची से कभी हटाई नहीं गई थी। “पिछले एक दशक में मौजूदा पठन सूची में कोई संशोधन नहीं किया गया है। पुस्तक कभी पाठयक्रम का हिस्सा रही ही नहीं थी क्योंकि इसे 2016 में प्रकाशित किया गया था।

प्राध्यापक सदस्यों ने कहा कि पिछले साल विरोध के बाद सुन्दर की पुस्तक को पठन सूची में संशोधन की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया था। सदस्य ने यह भी कहा, “पाठ्यक्रम का संशोधन चल रहा है और अब हम राजनीतिक समाजशास्त्र पत्र के लिए सुंदर की किताब जोड़ने पर विचार कर रहे हैं।”

सुंदर ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि “मेरी पुस्तक को शामिल करना है या नहीं इस पर विचार चल रहा है। हालांकि, विभाग ने अभी तक फाइनल कॉल नहीं किया है।

कई प्रयासों के बावजूद भी डीयू के समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख किसी भी तरह की टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं किया जा सकता है।

समाजशास्त्र विभाग की स्टाफ काउंसिल के कुछ सदस्यों ने कहा है कि वे पुस्तक को शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि वे विवाद से बचना चाहते हैं। “शुक्रवार को पाठ्यक्रम के संशोधन के संबंध में एक कर्मचारी परिषद की बैठक हुई जिसमें कुछ सदस्यों ने पुस्तक को शामिल करने के विचार का विरोध किया। एक कर्मचारी परिषद के सदस्य ने कहा कि हम एक अनावश्यक विवाद फिर से नहीं बनाना चाहते हैं।

द बर्निंग फारेस्ट किताब के बारे में-

यह किताब ‘द बर्निंग फारेस्ट’ बस्तर के दमन पर लिखी गई है। उद्योगों के फायदे के लिए कैसे सरकार आदिवासियों पर अत्याचार कर रही रहै, सब इस किताब में बताया गया है। इसके अलावा दोनों पक्षी की लड़ाई, आदिवासियों की हत्या आदि का वर्णन इस किताब में किया गया है। अगर समाज शास्त्री को मानें तो वे ‘द बर्निंग फारेस्ट’ को मानव विज्ञान का शानदार अध्ययनों में से एक मानते हैं।

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