राइट टू एजुकेशन एक्ट में संसोधन को लोकसभा की मंजूरी, 8वीं क्लास तक फेल किए जाने नीति में बदलाव की है बात

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2009 के विधेयक में पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को फेल होने पर भी कक्षा में नहीं रोकने का प्रावधान था.

नई दिल्ली: लोकसभा ने आज राइट टू एजुकेशन एक्ट के उस संसोधन को मंजूरी दे दी है जिसके तहत अब 8वीं क्लास तक के बच्चों को फेल किए जाने की नीति में बदलाव की बात कही गई है. हालांकि बच्चों को उसी क्लास में रोकने या नहीं रोकने का अधिकार राज्य सरकारों के पास ही रहेगा.

 

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ”यह महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विधेयक है और इससे स्कूलों में शिक्षा में सुधार देखने को मिलेगा.” उन्होंने आगे कहा कि इस पहल से एग्जाम के साथ जवाबदेही आयेगी, शिक्षा और सीखने को बढ़ावा मिलेगा, पढ़ने और पढ़ाने को प्रोत्साहन मिलेगा और अंतत: ‘सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा’ सुनिश्चित हो सकेगी .

 

मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि नए संशोधन विधेयक में फेल होने की स्थिति में बच्चों को कक्षा में रोकने या नहीं रोकने का अधिकार राज्यों को दिया गया है. उन्होंने कहा कि 2009 के विधेयक में पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को फेल होने पर भी कक्षा में नहीं रोकने का प्रावधान था. इससे परीक्षा का महत्व ही कम हो गया था और शिक्षा के स्तर में गिरावट आ रही थी.

 

राज्यों के पास ही रहेगा परीक्षा लेने का अधिकार

 

अब पांचवी और आठवीं कक्षा के स्तर पर परीक्षा लेने की बात कही गई है. हालांकि जिन राज्यों को ऐसा करना है, वे करेंगे और जिनको बदलाव नहीं करना है वे अपना फैसला लेने के लिए आजाद रहेंगे. जावड़ेकर ने कहा कि परीक्षा लेने के बारे में राज्य तय करेंगे कि उन्हें किस स्तर पर परीक्षा लेनी है. उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी छात्र को स्कूल से नहीं निकाला जा सकेगा .

 

जावड़ेकर ने कहा कि 22 राज्यों ने इस प्रावधान को बदलने की सिफारिश की. कई सर्वे में भी पता चला कि बच्चों को अपनी वर्तमान कक्षा से कम क्लास के विषयों की ही जानकारी नहीं है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी छात्र को उसी कक्षा में रोकने के लिए नहीं है.

 

नए संशोधन के तहत पांचवीं और आठवीं कक्षा की मार्च में होने वाली पहली परीक्षा में फेल होने वाले विद्यार्थियों को मई में दूसरी बार परीक्षा का अवसर मिलेगा. दूसरी बार भी फेल होने पर ही बच्चे को उसी कक्षा में रोका जा सकेगा. मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु और केरल समेत कुछ राज्य पुराने प्रावधान को ही चाहते थे. इसलिए हमने विधेयक में प्रावधान रखा है कि बच्चों को कक्षा में रोकने या नहीं रोकने का अधिकार राज्यों को होगा. लोकसभा में पास होने के बाद यह बिल राज्यसभा में जाएगा.

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