गंगा में उफान की आशंका, तटीय बस्तियों में बाढ़ का खतरा

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हरिद्वार, नरोरा और कानपुर को मिलाकर बृहस्पतिवार को गंगा में 4.17 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया। 24 घंटे पहले स्थिर रही गंगा में दोपहर बाद बढ़ाव होने लगा। शुक्रवार तक ऊपर से छोड़ी गई जल राशि के यहां पहुंचने का अनुमान है। इससे निचले इलाकों वाली बस्तियों में बाढ़ की आशंका पैदा हो गई है। हालात को देखते हुए बाढ़ राहत चौकियों को सतर्क कर दिया गया है। पुलिस, पीएसी के अलावा एनडीआरएफ के जवानों की निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी स्थिति से निबटा जा सके।

पहाड़ों पर हो रही बारिश और बांधों से लगातार जल छोड़े जाने से गंगा में अब किसी भी समय उफान आ सकता है। बृहस्पतिवार को कानपुर से 2,50,888 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इसी तरह नरोरा बांध से 1,20, 863 क्यूसेक और हरिद्वार से 45,301 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे पहले बुधवार को भी कानपुर से 2,20,596 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। बेनी बंध स्थित सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष की बुलेटिन के अनुसार दोपहर बाद गंगा में जल स्तर बढ़ने लगा है। रात 10 बजे फाफामऊ में गंगा का जल स्तर 79.010 मीटर, छतनाग में 77.210 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 77.840 मीटर पर रिकार्ड किया गया।

यमुना तो देर शाम तक स्थिर रही लेकिन गंगा में एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ाव होता रहा। बाढ़ नियंत्रण से जुड़े अफसरों के मुताबिक कानपुर से भारी मात्रा में छोड़े गए जल का असर गंगा में दिखने लगा है। शुक्रवार तक यहां जल दबाव बढ़ने का अनुमान है। पानी बढ़ा तो सबसे पहले अल्लापुर, चांदपुर, सलोरी, बख्शीमोढ़ा, बेली कछार की बस्तियों पर असर पड़ जाएगा। बाढ़ राहत शिविरों को खोलने के साथ ही प्रभावित इलाकों में बचाव के इंतजामों को दुरुस्त करने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं।

गंगा-यमुना का जल स्तर रात 10 बजे
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79.010 मीटर पर फाफामऊ
77.210 मीटर पर छतनाग
77.840 मीटर पर नैनी में यमुना

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