आयोग की भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर ध्वस्त

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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर ध्वस्त हो गया है। कैलेंडर की शुरुआत में सबसे पहली परीक्षा आयोग समय से नहीं करा सका और इसके बाद परीक्षाओं के टलने और स्थगित होने का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जो अब तक बरकरार है।

आयोग ने छह-छह माह की परीक्षाओं के दो अर्धवार्षिक कैलेंडर जारी किए और इनमें से ज्यादातर परीक्षाएं टाल दी गईं। आयोग के पहले अर्धवार्षिक कैलेंडर में फरवरी से जून तक 11 परीक्षाओं का आयोजन प्रस्तावित था लेकिन 11 फरवरी को प्रस्तावित अपर निजी सचिव (कंप्यूटर ज्ञान) परीक्षा-2013 का आयोजन ही आयोग समय से नहीं करा सका और परीक्षा टाल दी। इसके बाद आयोग के कैलेंडर में दूसरे नंबर प्रवक्ता राजकीय इंटर कॉलेज (स्क्रीनिंग) परीक्षा-2017 को जगह दी गई थी, जिसके आयोजन की प्रस्तावित तिथि 25 फरवरी 2018 थी लेकिन आयोग यह परीक्षा भी समय से नहीं करा सका। आयोग ने परीक्षा स्थगित कर दी और दूसरे अर्धवार्षिक कैलेंडर में इसके आयोजन की प्रस्तावित तिथि 23 सितंबर निर्धारित की है। वहीं, पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा की तिथि भी दो बार टाली गई। पहले यह परीक्षा 17 मार्च को प्रस्तावित थी। इसके बाद 17 मई की तिथि तय की गई और अंत में 18 जून से सात जुलाई तक परीक्षा कराई गई।

पीसीएस एवं एसीएफ/आरआएफओ-2018 के आयोजन की प्रस्तावित तिथि 19 अगस्त थी, जिसे आयोग ने टाल दिया है। हालांकि यह परीक्षा आयोग के पहले कैलेंडर में भी थी और सबसे पहले इसके आयोजन की तिथि 24 जून निर्धारित की गई थी। फिर टालकर 19 अगस्त और अब 28 अक्तूबर हो गई है। ऐसे में यह परीक्षा दो बार टल चुकी है। आयोग के कैलेंडर में 29 अक्तूबर को प्रस्तावित राजकीय डिग्री कॉलेज प्रवक्ता (स्क्रीनिंग) परीक्षा-2017 स्थगित की गई है। इसी तरह 29 जुलाई को आयोजित एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा भी दो बार टाले जाने के बाद हो सकी। पहले यह परीक्षा छह कई को प्रस्तावित थी। इसके बाद 24 जून की तिथि निर्धारित की गई और आखिरी बार इसे टालकर 29 जूनवरी को परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया। आयोग ने पिछले शुक्रवार को ही एसीएफ/आरएफओ प्रारंभिक परीक्षा-2017 का परिणाम घोषित किया है जबकि मुख्य परीक्षा की तिथि आयोग के कैलेंडर में 20 मई से निर्धारित थी। अब आयोग ने मुख्य परीक्षा की तिथि 10 से 20 सितंबर निर्धारित की है।

परीक्षाओं के बार-बार टलने से अभ्यर्थियों की तैयारी पर प्रभाव पड़ रहा है। परीक्षाओं के पाठ्यक्रम अलग-अलग होते हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों को अलग-अलग तैयारी भी करनी होती है। जब एक परीक्षा की तैयारी पूरी होने के करीब होती है तो वह परीक्षा टाल दी जाती है और अभ्यर्थियों को दूसरी परीक्षा की तैयारी में जुटना पड़ता है। अगर दूसरी परीक्षा टाल दी गई तो किसी अन्य परीक्षा की तैयारी नए सिरे से करनी पड़ती है। ऐसे में परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी लगातार असमंजस में हैं कि पहले किस परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करें। परीक्षा टलने पर नुकसान केवल अभ्यर्थियों का हो रहा है।

आयोग ने पहले अर्धवार्षिक कैलेंडर में पीसीएस-जे प्रारंभिक परीक्षा के लिए के लिए 13 मई की तिथि निर्धारित की थी और यह कहा गया था कि 15 जनवरी तक पदों का अधिचायन प्राप्त होने पर निर्धारित तिथि पर परीक्षा कराई जाएगी। पदों का अधियाचन नहीं मिल सका तो परीक्षा टाल दी गई। इसके बाद दूसरे अर्धवार्षिक कैलेंडर में परीक्षा को जगह नहीं दी गई। आयोग को पीसीएस-जे के 333 पदों का अधिचायन मिलने माह भर से अधिक समय बीत चुका है लेकिन अब तक इसका विज्ञापन अटका हुआ है।

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